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104 वर्ष बाद 3 घंटे 54 मिनट का लगेगा चंद्रग्रहण

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन ये सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण लगने वाला है । 104 साल के बाद 27 जुलाई की रात लगने वाला ये ग्रहण 3 घंटे 54 मिनट का रहेगा । इससे पहले सन 1914 में इतना लंबा ग्रहण लगा था । खगोल शास्त्रियों के अनुसार ग्रहण सिर्फ और सिर्फ खगोलीय घटना होती है । ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं । इस बार इस खगोलीय घटना की अवधि कुछ ज्यादा है । लेकिन इसका इंसान के ऊपर कोई असर नहीं पड़ने वाला है । ग्रहण 27 जुलाई को रात्रि 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा और मध्य रात्रि एक बजकर 52 मिनट पर खत्म होगा । ग्रहण का सबसे खूबसूरत नजारा ग्रहण शुरू होने के बाद पहले एक घंटे 42 मिनट में होगा, जब चांद गहरे लाल के साथ ब्राउन रंग में दिखेगा । ग्रहण का पूर्ण असर 3.49 मिनट तक चलेगा । इस तरह ग्रहण काल 3 घंटे 54 मिनट का होगा । ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट पर लग जाएगा ।

ज्योतिषविदों के मुताबिक चंद्र ग्रहण का असर मिलाजुला रहेगा । सेना नायक, मंत्री, कथा वाचक, पंडित, उद्योगपति और प्रशासक समुदाय के लोगों के लिए इस चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं माना गया है । व्यापारियों को सुपारी, गुड़, तेल लाल रंग की वस्तु, चावल, सोना, घी के व्यापार में लाभ होगा ।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण उत्तराषढ़ा व श्रवण नक्षत्र में लग रहा है, यह नक्षत्र मकर राशि का होेता है इसलिए मकर राशि वालों को विशेष सावधान रहने की जरूरत है । शेष मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन राशि वालों के लिए चंद्र ग्रहण सुखद रहेगा । वृष, कर्क, कन्या व धनु राशि वालों के लिए सामान्य रहेगा । मिथुन, तुला, मकर व कुंभ राशि वालों पर ग्रहण का असर ज्यादा बताया जा रहा है ।
शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जप, पाठ करना शुभ होता है । ग्रहण के बाद विभिन्न वस्तुओं का दान करने से ग्रह शांत होते हैं । ग्रहण काल के दौरान कुछ खाना नहीं चाहिए । किसी भी नुकीली वस्तु का उपयोग नहीं करना चाहिए । गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए ।