द पॉलिटिक्स अगेन
4 बार खारिज हुआ सवर्ण आरक्षण

1- वर्ष 1991 में मंडल कमीशन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने आर्थिक आधार पर 10 फीसद आरक्षण का फैसला लिया था। वर्ष 1992 में कोर्ट ने इस फैसले को निरस्त कर दिया था।
2- बिहार में पिछड़ों को 27 फीसद आरक्षण देने के बाद वर्ष 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ने आर्थिक आधार पर सवर्णों को 03 फीसद आरक्षण दिया था। बाद में कोर्ट ने इस फैसले को भी निरस्त कर दिया था।
3-सितंबर 2015 में राजस्थान सरकार ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक पिछड़ों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 14 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया था। दिसंबर 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बिल को रद कर दिया। हरियाणा में भी इसी तरह सवर्ण आरक्षण खत्म कर दिया गया था।
4-गुजरात सरकार ने अप्रैल 2016 में सामान्य वर्ग के आर्थिक पिछड़े लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया था। उस वक्त फैसले में कहा गया था कि छह लाख रुपये सालाना आय से कम वाले परिवारों को इस आरक्षण के अधीन लाया जा सकता है। अगस्त 2016 में गुजरात हाईकोर्ट ने इस फैसले को गैरकानूनी और असंवैधानिक बता रद कर दिया था।